Ahsec Class 12 Hindi (MIL) Solved Question Paper - 2026| ASSEB BOARD

Ahsec Class 12 Hindi (MIL) Solved Question Paper - 2026| ASSEB BOARD

2026
HINDI
(MODERN INDIAN LANGUAGE)
Full Marks: 100
Pass Marks: 30
Time: 3 hours
The figures in the margin indicate full marks for the questions.

 

1. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: 1×5=5

प्रभात की पहली किरणों में

छिपा है नव संजीवन का संदेश

हर अँधेरी रात के बाद

फिर जागता है नया उत्सेश

जो चलते रहते निरंतर,

उनके पथ में फूल खिलते हैं।

प्रश्न:

() काव्यांश में 'नव संजीवन' किसके आने का संकेत है?

उत्तर: काव्यांश में 'नव संजीवन' प्रभात की पहली किरणों के आने का संकेत है।

() अँधेरी रात के बाद क्या जागता है?

उत्तर: अँधेरी रात के बाद नया उत्सेश (नया सवेरा/उत्साह) जागता है।

() कवि के अनुसार किसके पथ में फूल खिलते हैं?

उत्तर: कवि के अनुसार जो निरंतर चलते रहते हैं (जो कभी हार नहीं मानते और कर्मशील रहते हैं), उनके पथ में फूल खिलते हैं।

() काव्यांश में किस समय की किरणों का उल्लेख हुआ है?

उत्तर: काव्यांश में प्रभात (सुबह) की पहली किरणों का उल्लेख हुआ है।

() काव्यांश का एक सार्थक शीर्षक दीजिए।

उत्तर: इस काव्यांश का एक सार्थक शीर्षक "कर्म और प्रेरणा" या "प्रभात का संदेश" हो सकता है।

2. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: 15

प्रकृति मानव जीवन की आधार शिला है। पर्वत, नदियाँ, वृक्ष और पशु-पक्षी सब हमारे पर्यावरण के अभिन्न हिस्से हैं। परंतु आधुनिक जीवन की आपाधापी में मनुष्य ने प्रकृति से अपना संबंध धीरे-धीरे कमजोर कर लिया है। बढ़ते प्रदूषण, जंगलों की कटाई और अंधाधुंध उद्योगीकरण ने पर्यावरण को गंभीर संकट में डाल दिया है।) (यदि मनुष्य ने अभी भी सतर्कता नहीं बरती, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना कठिन हो जाएगा।'

प्रकृति का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है (छोटी-छोटी आदतों, जैसे- -- जल बचाना, पौधारोपण करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना आदि से भी बड़ा परिवर्तन संभव हो सकता है (जब समाज के सभी लोग मिलकर प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनते हैं तभी पर्यावरण संतुलन बहाल हो सकता है।) यह केवल वर्तमान, बल्कि भविष्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

प्रश्न:

() मनुष्य और प्रकृति के संबंध के बारे में गद्यांश में क्या बताया गया है? 2

उत्तर: गद्यांश में बताया गया है कि प्रकृति मानव जीवन की आधारशिला है और पर्वत, नदियाँ, वृक्ष तथा पशु-पक्षी हमारे पर्यावरण के अभिन्न हिस्से हैं। परंतु आधुनिक जीवन की आपाधापी के कारण मनुष्य ने प्रकृति से अपना संबंध धीरे-धीरे कमजोर कर लिया है।

() पर्यावरण संकट के मुख्य कारण क्या बताए गए हैं? 2

उत्तर: गद्यांश के अनुसार पर्यावरण संकट के मुख्य कारण बढ़ते प्रदूषण, जंगलों की अंधाधुंध कटाई और अनियंत्रित औद्योगिकीकरण हैं।

() यदि मनुष्य सतर्क हुआ तो क्या परिणाम हो सकते हैं? 2

उत्तर: यदि मनुष्य ने अभी भी सतर्कता नहीं बरती, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना बेहद कठिन हो जाएगा।

() प्रकृति संरक्षण को केवल सरकार की जिम्मेदारी क्यों नहीं माना गया है? 2

उत्तर: प्रकृति संरक्षण को केवल सरकार की जिम्मेदारी इसलिए नहीं माना गया है क्योंकि पर्यावरण से सीधा जुड़ाव और प्रभाव हर नागरिक के जीवन पर पड़ता है, इसलिए इसे बचाने में समाज के प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत और सामूहिक सहभागिता आवश्यक है।

() छोटी-छोटी आदतें पर्यावरण के लिए कैसे उपयोगी हो सकती हैं? 2

उत्तर: जल बचाना, पौधारोपण करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना जैसी छोटी-छोटी आदतें मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं और पर्यावरण संतुलन को बहाल करने में मदद कर सकती हैं।

() उपर्युक्त गद्यांश का एक सार्थक शीर्षक दीजिए। 1

उत्तर: "पर्यावरण संरक्षण और हमारा दायित्व" या "प्रकृति और मानव" इस गद्यांश का एक सार्थक शीर्षक हो सकता है।

() निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए: 2

आधार - शिला; आपाधापी ; सतर्कता; संवेदनशील।

उत्तर: आधार-शिला: नींव / मूल आधार / बुनियादी ढांचा

आपाधापी: भागदौड़ / व्यस्तता / अफरातफरी

सतर्कता: चौकसी / सावधानी / सचेत रहना

संवेदनशील: सहृदय / भावनाशील / जो दूसरों के सुख-दुख या प्रकृति की पीड़ा को महसूस करे

() विलोमार्थी शब्द लिखिए: 2

आधुनिक ; कूटाई; संरक्षण ; भविष्य।

उत्तर: आधुनिक: प्राचीन / पुरातन

कटाई: रोपण / बुआई (नोट: गद्यांश में 'कटाई' शब्द है, जिसका विलोम 'रोपण' या बुआई होगा)

संरक्षण: विनाश / विध्वंस / असुरक्षा

भविष्य: भूत / अतीत

3. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए: 10

() खेल का महत्त्व

(प्रस्तावना-खेल के प्रकार-खेल का महत्त्व - आधुनिक शिक्षा-व्यवस्था और खेल- उपसंहार)

उत्तर: प्रस्तावना:-

"स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है।" इस सुप्रसिद्ध उक्ति को चरितार्थ करने में खेल की भूमिका सर्वोपरि है। खेल केवल मनोरंजन का साधन या समय बिताने का जरिया नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के सर्वांगीण विकास का एक अनिवार्य स्तंभ है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक, खेलों का महत्व मानव संस्कृति का एक अभिन्न अंग रहा है। यह व्यक्ति को शारीरिक रूप से सबल और मानसिक रूप से प्रखर बनाने का सबसे सशक्त माध्यम है।

खेल के प्रकार:-

खेलों को मुख्य रूप से दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:-

(i) इनडोर गेम्स (घर के भीतर खेले जाने वाले खेल): शतरंज, कैरम, लूडो, टेबल टेनिस और बैडमिंटन (इनडोर कोर्ट पर) आदि। ये खेल मुख्य रूप से बौद्धिक क्षमता, एकाग्रता, धैर्य और मानसिक कौशल को विकसित करते हैं।

(ii) आउटडोर गेम्स (खुले मैदान में खेले जाने वाले खेल): क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और एथलेटिक्स आदि। ये खेल शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं, सहनशक्ति बढ़ाते हैं और सामूहिक भावना को पोषित करते हैं।

इनके अलावा, पारंपरिक खेल जैसे कबड्डी, खो-खो और गिल्ली-डंडा हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं जो कम संसाधनों में भी उच्च स्तर की फिटनेस प्रदान करते हैं।

खेल का महत्त्व:-

मानव जीवन में खेलों का बहुआयामी महत्व है:-

(i) शारीरिक स्वास्थ्य: खेलकूद से रक्त संचार बेहतर होता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और मोटापा जैसी बीमारियां दूर रहती हैं।

(ii) मानसिक विकास: पढ़ाई के तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी से मानसिक शांति पाने के लिए खेल एक अचूक औषधि हैं। यह निर्णय लेने की क्षमता और एकाग्रता को तीव्र करते हैं।

(iii) चरित्र निर्माण और अनुशासन: खेल के मैदान पर खिलाड़ी नियमों का पालन करना सीखते हैं। यह अनुशासन जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की नींव रखता है।

(iv) सहयोग और टीम भावना: सामूहिक खेल बच्चों और युवाओं में भाईचारा, एक-दूसरे का सम्मान और टीम वर्क की भावना जगाते हैं। यह सिखाता है कि व्यक्तिगत सफलता से बढ़कर सामूहिक लक्ष्य महत्वपूर्ण होता है।

(v) हार-जीत की भावना: खेल हमें सिखाता है कि जीत और हार सिक्के के दो पहलू हैं। यह पराजय से निराश हुए बिना पुनः प्रयास करने और सफलता से अहंकार पालने का जीवन-पाठ पढ़ाता है।

आधुनिक शिक्षा-व्यवस्था और खेल:-

आज की आधुनिक शिक्षा-व्यवस्था में अंकों की अंधी दौड़ और किताबी कीड़े बनने की प्रवृत्ति ने छात्रों के जीवन से खेल को लगभग गायब सा कर दिया है। अभिभावक और विद्यालय अक्सर केवल अकादमिक प्रदर्शन पर जोर देते हैं, जिससे विद्यार्थियों का शारीरिक और मानसिक विकास अधूरा रह जाता है।

सौभाग्य से, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और समकालीन शैक्षिक सुधारों में खेलों को पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य हिस्सा माना गया है। अब 'खेलो इंडिया' जैसी पहलों के माध्यम से खेलकूद को एक वैकल्पिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि मुख्यधारा के करियर और जीवन कौशल के रूप में देखा जा रहा है। खेल अब केवल शौक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित करियर विकल्प बन चुके हैं।

उपसंहार:-

खेल जीवन की जीवंतता का प्रतीक हैं। जिस प्रकार शरीर के लिए भोजन आवश्यक है, उसी प्रकार ऊर्जावान और संतुलित जीवन के लिए खेल भी उतने ही आवश्यक हैं। हमें अपनी दिनचर्या में खेलों के लिए समय निकालना चाहिए और समाज में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। स्वस्थ युवा ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण करते हैं, और सशक्त युवाओं के निर्माण में खेल की भूमिका अमूल्य है।

() आतंकवाद

(प्रस्तावना- आतंकवाद का अर्थ और रूप- मानवता का शत्रु आतंकवाद- आतंकवाद के खिलाफ भारत - उपसंहार)

उत्तर: प्रस्तावना:-

आज संपूर्ण विश्व के लिए 'आतंकवाद' एक भयंकर अभिशाप और नासूर बन चुका है। जो समस्या कभी किसी एक क्षेत्र या देश तक सीमित हुआ करती थी, वह आज विकराल रूप धारण कर वैश्विक शांति, सुरक्षा और मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है। आतंकवाद का कोई धर्म, जाति या राष्ट्र नहीं होता; इसका एकमात्र उद्देश्य निर्दोषों में भय फैलाकर अपने स्वार्थी और संकीर्ण उद्देश्यों को पूरा करना होता है।

आतंकवाद का अर्थ और रूप:-

सामान्य शब्दों में, 'आतंकवाद' का अर्थ राजनीतिक, वैचारिक या धार्मिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए हिंसा, भय और आतंक का सहारा लेना है। यह असामाजिक तत्वों द्वारा फैलाया गया वह अंधकार है जो कानून के शासन और मानवीय मूल्यों को खुली चुनौती देता है।

समय के साथ आतंकवाद के स्वरूप में भी बदलाव आया है:-

(i) भौतिक या हिंसक आतंकवाद: बम विस्फोट, गोलीबारी, अपहरण और लक्षित हत्याएं इसके पारंपरिक रूप हैं।

(ii) साइबर आतंकवाद: आधुनिक युग में आतंकवादी संगठनों ने इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके वित्तीय नेटवर्क को बाधित करना और दुष्प्रचार फैलाना शुरू कर दिया है।

(iii) राज्य-प्रायोजित आतंकवाद: जब कुछ देश अपने भू-राजनीतिक हितों को साधने के लिए परोक्ष रूप से आतंकवादी संगठनों को वित्तीय सहायता और हथियार मुहैया कराते हैं, तो यह वैश्विक शांति के लिए और अधिक खतरनाक हो जाता है।

मानवता का शत्रु आतंकवाद:-

आतंकवाद मानवता का खुला शत्रु है क्योंकि यह किसी सैनिक या दुश्मन सेना से नहीं लड़ता, बल्कि स्कूलों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक परिवहन में बैठे बेकसूर नागरिकों को निशाना बनाता है। इसके कारण पल भर में हजारों परिवार उजड़ जाते हैं, बच्चे अनाथ हो जाते हैं और अर्थव्यवस्थाएं चरमरा जाती हैं। पर्यटन, उद्योग और व्यापार पर इसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह युवाओं के कोमल मस्तिष्क को भ्रमित कर उन्हें हिंसा के मार्ग पर धकेल देता है, जिससे पूरी युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय हो जाता है।

आतंकवाद के खिलाफ भारत:-

भारत सदियों से शांति, अहिंसा और 'वसुधैव कुटुंबकम्' (संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार है) के संदेश का वाहक रहा है, लेकिन पड़ोसी देशों से प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद (Cross-border Terrorism) का सबसे बड़ा शिकार भी भारत ही रहा है। मुंबई हमले (26/11), पुलवामा हमला और संसद पर आक्रमण जैसी दुखद घटनाओं ने देश को हिलाकर रख दिया, परंतु हर बार भारत ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और पराक्रम से इसका मुंहतोड़ जवाब दिया है।

भारतीय सुरक्षा बलों की बहादुरी और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कदमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत आतंकवाद के प्रति शून्य सहहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति पर चलता है। इसके साथ ही, भारत वैश्विक मंचों पर लगातार आतंकवाद के खिलाफ कड़े कानूनों और वैश्विक सहयोग की मांग उठाता रहा है ताकि आतंकवाद को वित्तीय और वैचारिक समर्थन मिलना बंद हो सके।

उपसंहार:-

आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के विरुद्ध अपराध है। इस गंभीर संकट से निपटने के लिए केवल सैन्य कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके वैचारिक जड़ों को उखाड़ फेंकना होगा। इसके लिए सभी देशों को अपनी कूटनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा, युवाओं को कट्टरपंथ से बचाना होगा और शिक्षा तथा रोजगार के अवसरों का विस्तार करना होगा। जब तक विश्व समुदाय मिलकर इस दानव का संपूर्ण सफाया नहीं करता, तब तक धरती पर सच्ची शांति और प्रगति की कल्पना करना असंभव है।

() भारत की राष्ट्रीय एकता

(प्रस्तावनामहत्त्वउपायनई पीढ़ी की भूमिकाउपसंहार)

() बेरोजगारी

(प्रस्तावनाकारणहानियाँ समाधान के उपाय - उपसंहार)

4. अपने गाँव के पुस्तकालय की खराब स्थिति को सुधारने हेतु ग्राम सचिव को पत्र लिखिए। 5

उत्तर: अपने गाँव के पुस्तकालय की खराब स्थिति को सुधारने हेतु ग्राम सचिव को पत्र:-

सेवा में,

ग्राम सचिव महोदय,

ग्राम पंचायत – [गाँव का नाम],

जिला – [जिले का नाम], असम।

विषय: ग्राम पुस्तकालय की जर्जर और खराब स्थिति को सुधारने के संबंध में।

 

महोदय,

सविनय निवेदन यह है कि मैं [आपका नाम], आपके ग्राम पंचायत का एक जागरूक निवासी हूँ। यह पत्र मैं हमारे गाँव के एकमात्र सार्वजनिक पुस्तकालय की अत्यंत दयनीय और खराब स्थिति की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए लिख रहा हूँ।

वर्तमान में पुस्तकालय की स्थिति बेहद चिंताजनक है। लंबे समय से रखरखाव होने के कारण भवन की छत टपकने लगी है, जिससे वहाँ रखी बहुमूल्य पुस्तकें नमी और दीमक के कारण नष्ट हो रही हैं। इसके अतिरिक्त, पुस्तकालय में तो बैठने के लिए पर्याप्त और सही बेंच-टेबल हैं और ही गर्मियों या सर्दियों के अनुकूल कोई उचित व्यवस्था है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हमारे गाँव के विद्यार्थियों और अन्य पाठकों के लिए वहाँ अध्ययन करने का अनुकूल वातावरण बिल्कुल समाप्त हो चुका है।

अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेते हुए यथाशीघ्र पुस्तकालय के जीर्णोद्धार (मरम्मत), नई पुस्तकों की उपलब्धता और वहाँ मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। आपकी इस पहल से गाँव के छात्र-छात्राओं और युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में अत्यधिक लाभ मिलेगा।

 

सधन्यवाद!

 

दिनांक: [आज की तिथि]

स्थान: [गाँव का नाम]

आपका/आपकी विश्वासी,

[आपका नाम]

ग्राम – [गाँव का नाम]

जिला – [जिले का नाम], असम

अथवा

शहरों में घटते भू-जल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए किसी स्थानीय समाचार पत्र के संपादक के नाम पत्र लिखिए

5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए: 1×5 = 5

() संपादक का मुख्य काम क्या है?

उत्तर: संपादक का मुख्य काम प्राप्त सामग्री (समाचार, लेख आदि) की अशुद्धियों को सुधारना, उसकी पठनीयता को जांचना और उसे प्रकाशन के योग्य बनाना है।

() खोजी पत्रकारिता से क्या आशय है?

उत्तर: खोजी पत्रकारिता वह है जिसमें पत्रकार उन गहरी और छिपी हुई जानकारियों, घोटालों या सच्चाइयों को उजागर करते हैं जिन्हें दबाने या छिपाने का प्रयास किया जाता है।

() प्रिंट माध्यम से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: प्रिंट माध्यम से आशय मुद्रित या छापे गए संचार माध्यमों (जैसे- समाचार पत्र, पत्रिकाएं, पुस्तकें) से है, जिन्हें पढ़कर सूचनाएं प्राप्त की जाती हैं।

() नव्य इलेक्ट्रॉनिक जनसंचार माध्यम का एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: इंटरनेट / सोशल मीडिया / पॉडकास्ट / न्यूज़ पोर्टल (इनमें से कोई एक)

() समाचार की भाषा कैसी होनी चाहिए?

उत्तर: समाचार की भाषा सरल, स्पष्ट, सहज, बोधगम्य और संक्षिप्त होनी चाहिए ताकि आम पाठक उसे आसानी से समझ सके।

6. अपने विद्यालय या महाविद्यालय के वार्षिक सप्ताह के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम पर एक आलेख प्रस्तुत कीजिए। 5


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